Thursday, May 12, 2016

विष्णु के दो अर्थ है

विष्णु के दो अर्थ है- पहला विश्व का अणु और दूसरा जो विश्व के कण-कण में व्याप्त है।
गुह्यतिगुह्य पुराण महाविद्याओं
को भगवान विष्णु के दस अवतारों
से सम्बद्ध करता है और यह व्याख्या करता है कि महाविद्या वे स्रोत है जिनसे
भगवान विष्णु के दस अवतार उत्पन्न
हुए थे। महाविद्याओं के ये दसों रूप
चाहे वे भयानक हों अथवा सौम्य,
जगज्जननी के रूप में पूजे जाते है।
दुर्गा सप्तसती के अनुसार भगवान
विष्णु जब निद्रा मग्न थे तब मधु -कैटभ
नाम के दैत्यों ने ब्रह्मा पर आक्रमण किया , तब
ब्रम्हा ने निद्रा रूपी महाकाली की स्तुति की और
योगमाया भगवान विष्णु की निद्रा रूप को
त्याग कर साकार रूप में प्रकट हुई। तब विष्णु ने दैत्यों का अंत किया। योगमाया और विष्णु एक ही रूप कारण भाई -बहन संबंध में बंध गए।
महाकाली ने अपने आप को दो रूपों में प्रकट किया काले रूद्र रूप में काली और सौम्य रूप
पार्वती। नए अवतार में पार्वती ने शिव को पति
रूप में प्राप्त किया। और काली ऊर्जा रूप में
प्रकृति में समाहित हो गयी। जब भी माँ पार्वती को आवश्यकता होती वो काली रुपी ऊर्जा का
आवाहन कर दानवो का दलन करती है। जब
विष्णु ने कृष्ण अवतार धारण किया तो
काली ने अपनी समस्त ऊर्जा के साथ कृष्ण के शरीर में प्रवेश कर लिया इस कारन कृष्ण का
रंग काला हो गया। वही पार्वती ने भी यशोदा के घर जन्म लिया और कंश को चेतावनी देने के
बाद विंध्य पर्वत पर चली गयी ,इस कारन वो
विंध्यवाशिनी नाम से विख्यात हुई। कृष्ण और
काली दोनों का बीज मंत्र "क्लीं " है इसलिए बंगाल में।कृष्ण को माँ काली अवतार मानते है।

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